क्या होगा अगर हम सूरज पर उतरने की कोशिश करें ?

आज हम बात करने जा रहे हैं। सूरज पर लैंड करने जाने की उतरने की आपको बता दें, कि इंसान आज तक सिर्फ चांद पर ही लैंड कर पाया है। लेकिन जल्द ही वह मंगल ग्रह पर भी उतर जाएगा, और वहां एक नई दुनिया बसाने की शुरुआत कर देगा।


यह काम कुछ ही सालों में होने वाला है। अगर आपके पास पैसा पर हेल्थ है ,तो आप भी मंगल ग्रह पर जाकर रह सकेंगे अगर बात करें ,कि सौर मंडल में मौजूद किस ग्रह पर इंसान को उतर सकता है तो एकमात्र मंगल ही ऐसा ग्रह है। जहां इंसान उतर सकता है। रह सकता है लेकिन स्पेश सूट पहनकर, अगर शुक्र ग्रह की बात करें ,तो वह बहुत गर्म है। वही बात करें बुध ग्रह की तो वहां भी उतरना संभव नहीं है। 

बात करें जुपिटर, यूरेनस की वहां पर जमीन ही नहीं यानी कि वह गैस के बने हुए हैं या फिर आई थी वहां पर हम लैंड कैसे करेंगे तो काफी कठिन है तू अगर हमें सूरज पर उतरने की कोशिश करें तो क्या होगा। आज हम आपको ले चलते हैं। एक खतरनाक मिशन पर जिसका नाम है।

और हम यहां आने की कोशिश नहीं करेंगे ना कल सूरज इतना पसंद आ गया है। कि वह सूरज पर लगातार मिशन भेजता जा रहा है 2018 में उसने पार्कर सोलर प्रोब को सूर्य के लिए रवाना किया।

सूर्य के सबसे पास से गुजरने वाला जान है जब यह सूर्य के नजदीक था। तो सूर्य और पार्कर सोलर प्रोब की दूरी मात्र 6200000 किलोमीटर थी।

लेकिन क्या हो अगर हमें सूरज के और भी करीब जाना हो। उन पर लैंड करने से पहले हम मैं एक सफर तय करना होगा। तो चलिए हम धरती से लेकर स्पष्ट रूप में बैठकर सूरज की तरह निकल चुके हैं, और हमारा स्पेसशिप धातु से बना है जो सूरज के बीच तापमान में भी मिलेगा नहीं।

अभी तक ऐसी धातु मिली नहीं है। लेकिन सूरज पर जाने के लिए हमेशा मान लेते हैं। हम धरती से बाहर निकल चुके हैं। और काले घुप अंधेरे में चलते चले जा रहे हैं। अब हम सूरत से एक करोड़ किलोमीटर दूर है। और जी सूर्य के एटमॉस्फेयर की बाहरी लिया है, जिसे कोरोना के आदेश जहां पर तापमान है ज्यादा नहीं बल्कि 1000000 डिग्री सेल्सियस है।

मतलब लावा से 900 गुना ज्यादा कर हमने आपको पहले ही बता दिया है, कि हमारे स्पेसशिप ऐसी धातु से बना है, जो तापमान कितना भी हो वह पिक लेगा नहीं वही स्पेसशिप के अंदर का तापमान 23 डिग्री सेल्सियस है।

जिसके कारण हमें पता ही नहीं चला कि बाहर कितना गर्म है। हमारे आगे बढ़ता जा रहा है। और अब हम दूर से सिर्फ 3000 किलोमीटर दूर है। यह सूरज की दूसरी लेयर है जिसे क्रोमोस्फीयर कहा जाता है। यहां पर आप देख सकते हैं, की सूर्य गैसेस की लपटें छोड़ रहा है जो कि हजारों किलोमीटर दूर तक फैल जाती है। क्रोमोस्फीयर में तापमान 20000 डिग्री सेल्सियस होता है।

जो कि,सोलर कोरोना से काफी कम है। और वैज्ञानिक नहीं जानते कि 16 कोरोना इतना गर्म क्यों है। इसका सबसे बड़ा रहते हैं आप इसे ऐसे समझ सकते हैं, कि जब हम आज चलाते हैं तो आपके पास तापमान ज्यादा होता है।

और हम जितनी दूर जाते हैं। तापमान कम होता जाता है लेकिन उसके साथ कोई का है। हम जितना सूरज के पास जाते हैं। तापमान उतना ही कम होता जाता है। और दूर जाने पर लाखों डिग्री सेल्सियस हो जाता है, इतनी रहस्य को सुलझाने के लिए नासा ने पाकर सोलर प्रोब को भेजा है। पार्कर सोलर प्रोब से जुड़ी कई और जानकारियों को धरती पर भेजेगा। हमारे सफर अभी भी जारी है, और अब हम सूरज की अगली परत फोटोस फेयर में पहुंच गए हैं। जिसे हम धरती से रोजाना देखते हैं।

यहां पर हमारा वजन काफी ज्यादा हो जाएगा यहा क्योंकि सूरज की ग्रेविटी का हम पर असली प्रभाव होगा। अगर धरती पर हमारा वजन 75 किलोग्राम था तू जहां पर हम 2000 किलोग्राम के होंगे।

जोबकी 1 राइनो यानी गैंडे के वजन के बराबर होगा। यहां पर ग्रेविटी के कारण हमारी हड्डियां टूट जाएंगे और सारे ऑर्गन की चटनी बन जाएगी अगर हम यहां बच गए और सूरज पर उतरने की कोशिश करेंगे तब भी पाएंगे क्योंकि सच है, धरती की तरह सॉलिड यानी दोस्त नहीं है। हाइड्रोजन और हीलियम से बना एक विशाल गोला है।

धरती पर जीवन मौजूद है, लेकिन आपको पता है कि हम इंसान हैं और बहुत बड़े जिद्दी हैं ,तो सूरज की सतह पर उतरने की कोशिश करेंगे, लेकिन जैसे ही हम सूरज की सतह पर उतरेंगे ,तो देखेंगे कि हम सूरज के अंदर जा रहे हैं।

यहां कुछ काले धब्बे भी नजर आएंगे जिन्हें सनस्पॉट कहा जाता है, और लगभग पृथ्वी के साइज के होते हैं। मतलब समझ रहे हैं। ना आप यानी पृथ्वी कितनी बड़ी है। उतनी बड़ी सनस्पॉट होते हैं। जिस समय स्पॉट सूरी के अंदर से निकल रही प्रफुल्ल मैग्नेटिक फील्ड से पैदा होते हैं। जब जब उसने सपोर्ट बनते हैं। तो समझ जाइए कि वहां से 16 प्लेयर निकलने वाला है। हाइड्रोजन बम एक बार में पैदा कर सकता है।

सूर्य की सतह के अंदर जाते ही हम कन्वैक्शन जॉन में होंगे। यहां पर तापमान 2000000 डिग्री सेल्सियस होगा। आपको बता दें, कि यह तापमान इतना ज्यादा है, कि अगर हमने अपने स्पेसशिप में लगाई होती, तो वह इतने तापमान में बिल्कुल भी काम नहीं करती आपको बता दे। सेलम कार्बाइड की मदद लेते हैं। जो कि मैक्सिमम 4000 डिग्री सेल्सियस की गर्मी को सह सकता है।

हमारे सफर अभी भी जारी है। और हम सूर्य की सतह से 200000 किलोमीटर नीचे पहुंच चुके हैं। जिसे रेडियोएक्टिव जॉन कहते हैं। ये सूर्य की सबसे मोटी परत है। यहां पर दबाव पृथ्वी के आसपास करीब 65 से 10 करोड़ गुना ज्यादा है। ये इतना डेंस है ।कि यहां से लाइट भी क्रॉस नहीं कर सकती।

लेकिम हम अभी तक रेडमी धातु से बनी प्रेषित की वजह से अभी तक जिंदा है। अब हम से 500000 किलोमीटर अंदर आ चुके हैं और यह जगह तुर्की सेंटर से 195000 किलोमीटर दूर है।

यहां पर प्रेशर एटमॉस्फेरिक प्रेशर से 200 अरब गुना ज्यादा है। यहां पर Atoms एक दूसरी कितनी पास है। की बहा की डेंसिटी लोहे से 10 गुना ज्यादा है वही तापमान 1.52 डिग्री सेल्सियस है हमारा सफर अभी भी जारी है और हम सूर्य के सेंटर पर पहुंच चुके जो प्लाज्मा से बना है प्लाज्मा पदार्थ की चौथी अवस्था होती है बाकी तीन अवस्थाएं कौन सी है अभी हमें कमेंट करके बताएं।

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