सावन के महीने में कावड़ यात्रा क्यों निकाली जाती है ? सबसे पहले कावड़ कौन लेकर आया था।

 नमस्कार दोस्तों स्वागत है ।आप सभी का आज के इस न्यू आर्टिकल में दोस्तों आज हम बात करेंगे शिव के पवित्र महीने सावन और कावड़ के बारे में।


सावन का पवित्र महीना शुरू है। और हमें सब जानते हैं, सावन में हजारों लाखों शिवभक्त कावड़ियों के रूप में सड़कों पर नजर आते हैं। सावन में कावड़ी अपने कंधे पर कावर दिए और उसके दोनों छोरों पर जल कलश बांधे भोले बम का नारा लगाते हुए भी भक्ति में लीन देखते हैं। उत्तर भारत में यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। और शाह एवं महिला हो या बच्चा सब यात्रा में नजर आ ही जाते हैं। हर महादेव देवों का देव महादेव का अपने भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते है।

शिव शंकर भोलेनाथ की पूजा करने से सारे कष्टों का निवारण हो जाता है। मान्यता के अनुसार भगवान शिव को सावन का महीना काफी पसंद है। इसलिए सावन के महीने को शिव का महीना भी कहा जाता है। सावन के महीने में अपने भक्तों के बीच में रहते हैं। सावन के महीने में कावड़ यात्रा का विशेष महत्व है सावन में भगवान भोलेनाथ के भक्त कावड़ यात्रा करते हैं ऐसा कहा जाता है कि कावड़ यात्रा करने से शिव प्रसन्न होते हैं। और भक्तों को अपना आशीर्वाद देते हैं।

सावन के महीने में धरती की सैर करते हैं। अपने भक्तों के बीच में रहकर उनको अपना आशीर्वाद देते हैं सावन के महीने में कावड़ यात्रा का विशेष महत्व है। सावन में भगवान भोलेनाथ के भक्त कावड़ यात्रा करते हैं ऐसा कहा जाता है कि कावड़ यात्रा करने से शिव प्रसन्न होते हैं। और भक्तों को अपना आशीर्वाद देते हैं।

 1.सबसे पहली कावड़ यात्रा किसने की ?

 अब यह तो पता है कि सावन में कांवर यात्रा निकाली जाती है। पर क्या कभी आपने सोचा है ,कि इस कावड़ यात्रा की शुरुआत किसने की थी। और सबसे पहला कांवरिया कौन था। ऐसी मान्यता है कि अगर आप भोलेनाथ को खुश करना चाहते हैं। उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं।

निष्कर्ष तो कावड़ यात्रा से बेहतर उपाय और कुछ नहीं है। और यात्रा भक्तों को भगवान से जोड़ने का सीधा तरीका ऐसा कहा जाता है। कि कावड़ यात्रा करने से और भोलेनाथ पर गंगाजल चढ़ाने से भोलेनाथ के भक्तों की हर मनोकामना को पूरा कर देते कावड़ यात्रा के पीछे की एक कथा समुद्र मंथन के बाद 14 रत्नों में विष निकला उस विष को  शिव ने पीकर सृष्टि की सुरक्षा की ।ऐसा कहा जाता है। कि भगवान शिव में अकेली ऐसी ताकत थी।

ऐसे ही उन्होंने वित्त को किया उनका कला नीला पड़ गई इस वजह से भोलेनाथ को नीलकंठ का नाम किया गया उसी समय से यह मान्यता है, कि गंगाजल को शिवलिंग पर चढ़ाने से विष का प्रभाव कम होता है जिसे भगवान खुश होते हैं। यह तो आपने जान लिया कि आखिर सावन के पवित्र महीने में कावड़ यात्रा क्यों निकाली जाती है। अब आपको बताते हैं कि सबसे पहले कावड़ यात्रा किसने की थी और यात्रा करने से क्या फल की प्राप्ति होती है।

इस बात का कई जगह उल्लेख मिलता है, कि रावण जो भगवान भोलेनाथ का अनन्य भक्त था उसने सबसे पहले कावड़ की यात्रा की थी आपको बता दें, कि लंकापति रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त और उसने कई बार भगवान शिव को वरदान प्राप्त किए थे वह भी शिव जी के परम भक्त ने ही सबसे पहले कावड़िया के रूप में शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाया था। ऐसी मान्यता है। कि रावण का संहार करने वाले प्रभु श्री राम ने भी कावड़िया के रूप में बैजनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड के देवघर में है। उस पर गंगाजल विशरित किया था ऐसा माना जाता है कंधे पर कावर रखकर शिवजी का नाम लेते हुए चलने से काफी पुणे अर्जुन होता है। और हर पल के साथ एक अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।

कावड़ यात्रा मन को शांति प्रदान करें हमें जीवन की हर कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना करने की शक्ति देती है।

निष्कर्ष :- दोस्तों आज के आर्टिकल में हमने आप सभी को बताया है। कि कावड़ यात्रा सावन के महीने में क्यों निकाली जाती है। और सबसे पहले कावड़ यात्रा किसने निकली थी। दोस्तों हम उम्मीद करते हैं ,कि इस आर्टिकल के माध्यम से आप सभी को पता चल गया होगा कि सावन के महीने में कावड़ यात्रा क्यों निकाली जाती है, और सबसे पहले कावड़ कौन लेकर आया था। दोस्तों अगर जानकारी आप सभी को अच्छी लगी और आप भी भोले के सच्चे भक्त हैं तो पोस्ट को लाइक करें और कमेंट बॉक्स में जय भोले की लिखकर जरूर से सेंड करें। और अपने फ्रेंड्स के साथ जरूर से शेयर करें ताकि वह भी इस जानकारी को प्राप्त कर सकें। धन्यवाद अब दोस्तों मिलते हैं। अगले नेक्स्ट आर्टिकल में एक और ताजा जानकारी के साथ


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